विधानसभा में हंगामा, अनुदान मांगों की चर्चा का विपक्ष ने किया बहिष्कार
छत्तीसगढ़। विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान अफसरों की गैर मौजूदगी पर विपक्ष जमकर भड़का. विभागीय सचिव और डायरेक्टर के सदन में उपस्थित नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई. अनुदान मांगों पर चर्चा का बहिष्कार कर दिया. इसे लेकर एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए।
विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा का विपक्ष ने किया बहिष्कार
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान अभूतपूर्व स्थिति देखने मिली.सदन में मंत्री टंकराम वर्मा के विभागों के अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही थी. विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत की गई, लेकिन सदन में विभागीय सचिवों की गैरमौजूदगी पर विपक्ष भड़क उठा. अफसरों की मनमानी और अफसरशाही का आरोप लगाया. हालांकि तब सदन में संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप और विभागीय मंत्री टंकराम वर्मा सदन में मौजूद थे. इससे पहले भी अफसरों की गैरमौजूदगी पर विपक्ष नाराजगी जता चुका है. अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष ने सदन की कार्रवाई रोककर अफसर को बुलाने की मांग की. आसंदी के आग्रह को अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया. विपक्ष के विधायकों ने सरकार पर अफसरशाही हावी होने का आरोप लगाया।
उमेश पटेल ने अफसरों की मनमानी को लेकर लगाया आरोप
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक उमेश पटेल ने कहा. सरकार की जनता के प्रति और अफसरों की सरकार के प्रति जवाबदेही खत्म हो गई है. इसकी बानगी सदन में देखने मिल रही है. दूसरी और सत्ता पक्ष में विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया. संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा विपक्ष की पास सदन में चर्चा के लिए मुद्दे नहीं है, इसलिए बार-बार बहाने बनाकर विपक्ष चर्चा से भाग रहा है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष लगातार मंत्रियों पर जवाब नहीं दे पाने का आरोप लगा रहा है. अफसरों की गैरमौजूदगी भी सदन में विपक्ष की नाराजगी की वजह बन रही हैऐसे में एक बार फिर अफसरों की गैरजिम्मेदाराना बर्ताव ने सत्तापक्ष की किरकिरी तो कर ही दी. विपक्ष के सदस्यों को बैठे बिठाए बहिर्गमन का मुद्दा भी दे दिया. यह देखने वाली बात होगी कि ऐसे अफसरों पर कोई कार्रवाई भी होगी.या विपक्ष के बहिष्कार और सत्तापक्ष के मान मनौव्वल का क्रम चलता रहेगा।

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