आज गंगा सप्तमी है
आज गंगा सप्तमी है
- एडवोकेट दीपाली पाण्डेय और वृंदा मनजीत
वैसे तो इस पोर्टल पर हाल में नर्मदा सीरीज चल रही है परंतु जब आज गंगा सप्तमी है और मां गंगा को अमृतवाहिनी कहा जाता है, इस अवसर को हम गंवाना नहीं चाहते इसलिए यह लेख प्रस्तुत है...
गंगा सप्तमी 2026
आज मनाया जा रहा मां गंगा का पावन पर्व,
जानें शुभ मुहूर्त, कथा और पूजन विधि
वैशाख शुक्ल सप्तमी पर विशेष:
हिंदू मान्यता के अनुसार जिस गंगा नदी को अमृत स्वरूप माना गया है, उससे जुड़ा पावन पर्व गंगा सप्तमी आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन मां गंगा की पूजा और स्नान करने से जीवन के पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
क्या है गंगा सप्तमी का महत्व?
सनातन परंपरा में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण से जुड़ा है। गंगा को पापनाशिनी और पुण्यदायिनी माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ और बाद में ब्रह्मा जी के कमंडल में स्थापित हुईं।
गंगा सप्तमी 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि 22 अप्रैल को रात्रि 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 23 अप्रैल 2026 को रात्रि 08:49 बजे तक रहेगी। ऐसे में गंगा सप्तमी का पर्व 23 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जा रहा है। पूजा के लिए आज का सर्वोत्तम समय प्रातः 11:01 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक है।
गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। जब वे भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी की ओर बढ़ीं तो उनके वेग से सब कुछ बहने लगा। इसी दौरान ऋषि जाह्नु का आश्रम भी जलमग्न हो गया, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने गंगा के जल को पी लिया। बाद में भगीरथ के आग्रह पर ऋषि ने अपने कान से गंगा को पुनः प्रकट किया। इसी कारण गंगा को ‘जान्हवी’ नाम से भी जाना जाता है।
ऐसे करें मां गंगा की पूजा
गंगा सप्तमी के दिन प्रातःकाल गंगा स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
स्नान के बाद मां गंगा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष रोली, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, फल और मिष्ठान अर्पित करें। इसके बाद गंगा स्तोत्र, गंगा चालीसा या मां गंगा के 108 नामों का पाठ करें। पूजन के अंत में आरती करना अनिवार्य माना गया है, जिससे पूजा पूर्ण फलदायी होती है।

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