एडवोकेट दीपाली पाण्डेय एवं वृंदा मनजीत

भारत की पवित्र नदियों में नर्मदा का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। यह केवल एक नदी नहीं, बल्कि मध्य भारत की जीवनरेखा, संस्कृति की संवाहिका और आस्था की प्रतीक मानी जाती है। प्राचीन काल से ही नर्मदा नदी मानव जीवन को पोषित करती आ रही है और इसी कारण इसे 'जीवनदायिनी' कहा जाता है।

नर्मदा नदी का प्रवास

नर्मदा नदी का उद्‌गम मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में स्थित पवित्र तीर्थ अमरकंटक से होता है। यह नदी विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच से प्रवाहित होती हुई लगभग 1312 किलोमीटर की यात्रा तय करती है। नर्मदा भारत की उन गिनी-चुनी नदियों में से है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं और अंततः गुजरात में अरब सागर में मिल जाती है। अपने मार्ग में यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों को सिंचित करती है। भौगोलिक दृष्टि से नर्मदा घाटी अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है, जिसने इस क्षेत्र को कृषि और मानव बसाहट के लिए अनुकूल बनाया है।

जीवनदायिनी क्यों?

नर्मदा को जीवनदायिनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके जल से लाखों लोगों का जीवन जुड़ा हुआ है। नर्मदा का पानी पीने, खेती, पशुपालन और उ‌द्योगों के लिए उपयोगी है। इसके किनारे बसे गाँवों और शहरों की आर्थिक और सामाजिक संरचना काफी हद तक इसी

नदी पर निर्भर करती है। विशेष रूप से आदिवासी समाज के लिए नर्मदा केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि आजीविका और अस्तित्व का आधार है। नर्मदा घाटी में पनपी अनेक सभ्यताएँ इस बात का प्रमाण हैं कि यह नदी सदियों से जीवन को संवारती आई है।

नर्मदे हर

धार्मिक दृष्टि से नर्मदा नदी का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसे देवी का स्वरूप माना जाता है और श्रद्धालु इसे 'नर्मदे हर' कहकर नमन करते हैं। मान्यता है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से ही पापों का नाश हो जाता है। नर्मदा परिक्रमा की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसमें श्रद्धालु पूरी नदी की परिक्रमा पैदल करते हैं। ओंकारेश्वर, महेश्वर और अमरकंटक जैसे प्रसिद्ध तीर्थ नर्मदा के तट पर स्थित हैं, जो इसे आध्यात्मिक रूप से और भी महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।

नर्मदा या रेवा

नर्मदा नदी से जुड़े अनेक रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य भी हैं। प्राचीन ग्रंथों में नर्मदा को 'रेवा' नाम से भी जाना गया है। इसे भारत की सात पवित्र नदियों में शामिल किया जाता है। लोककथाओं और पुराणों में नर्मदा की उत्पत्ति और महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि नर्मदा के कंकड़ तक शिवस्वरूप माने जाते हैं, जो इसकी पवित्रता को दर्शाते हैं।
इस प्रकार नर्मदा नदी केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, आस्था और इतिहास का संगम है। आगामी लेखों में हम
नर्मदा नदी के इन पहलुओं को और गहराई से समझने का प्रयास करेंगे।