हाउ इज़ द जोश!!!
भोपाल – एडवोकेट दीपाली पाण्डेयः
नववर्ष 2026, बदलाव की शुरुआत बाहर नहीं, भीतर से... नये वर्ष में संकल्प क्यों टूटते हैं और समाधान कहां छिपा है? 2026 का पहला सबक – दुनिया नहीं, अपनी सोच बदलने की जरूरत... नववर्ष और नया द्रष्टिकोण - सच्चा परिवर्तन कैसे संभव है? नया वर्ष, नई उम्मीदें कुछ अपने आप से कुछ ब्रह्मांड से। कहा जाता है जैसा हम सोचते हैं वैसी ही तरंगें हमारे आसपास ऊर्जा बिखेरती है व वापस आती है। नया वर्ष केवल कैलेन्डर का बदलना नहीं होता। यह हमारी सोच, हमारी उम्मीदों व सपनों का रीसेट बटन होता है। नया वर्ष हमें याद दिलाता है कि पिछले 12 महिनों में हमने क्या पाया, क्या खोया! क्या गलतियां की! जिंदगी हमेशां नव वर्ष हमें एहसास कराता है कि आगे बढ़ना ही जीवन का असली मंत्र है। गिरते वो है जो कुछ अलग, नया करने की कोशिश करते हैं। हर वर्ष नया वर्ष आता है। हम अपने आप से कई वादे करते हैं। कई पूरे भी होते है। जो हमारे पैसलों से, कोशिशों से, अपनी सोच से पूर्ण होते हैं। जब इनसान खुद से पक्का वादा कर ले तो दुनिया की कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। आइए, इस वर्ष हम खुद से कुछ वादे करेंगे।
खुद से प्यार करेंगे, सीखना नहीं छोड़ेंगे, शिकायत कम शुक्रिया ज्यादा करेंगे। हर मजबूरी को ताकत में बदलेंगे। अपने सपनों की तरफ कदम बढ़ाएंगे। 2025 से क्या सीखेंगे? गलतियों की समीक्षा, उसका उन्मुलन करना, उपलब्धियों की समीक्षा करना।
नई योजनाओं का क्रियान्वयन करना
इस नव वर्ष में अपने भीतर की ऊर्जा का उपयोग करो। रोशनी को चमकने दो। क्योंकि दुनिया को वही बदलते हैं जो खुद को बदलने की हिंमत रखते हैं। नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। ये वर्ष आपको नई उम्मीदें, नई ऊर्जा एवम् नई सफलताएं दे। हमें नया शुरु करने का मौका देती है। बीते वर्ष की गलतियां, थकान, अधूरे सपने इन सबको पीछे छोड़कर आगे बढना । इन्सान एक नई रोशनी के साथ आगे बढता है। हां, यह 2025 का आखिरी महीना है और हम 2026 का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं, जो नई उम्मीदें, नए सपने और एक नई शुरुआत लेकर आता है; यह अलविदा कहने और नई यात्रा के लिए तैयार होने का समय है, जिसमें हम पीछे मुड़कर अनुभवों को याद करते हैं और आगे आने वाले अवसरों के लिए उत्साहित रहते हैं.
2025 को अलविदा कहने का समय
• अनुभवों का सार: 2025 हमें सिखाता है, परखता है और मजबूत बनाता है; हर याद के लिए धन्यवाद कहने का समय है.
• कृतज्ञता: उन सभी दोस्तों और पलों के लिए आभार व्यक्त करें जिन्होंने इस साल को यादगार बनाया.
2026 का स्वागत करें
• नई शुरुआत: 2026 एक नया चक्र शुरू करता है, अनंत संभावनाओं से भरा एक अज्ञात कदम.
• आशा और विश्वास: नई उम्मीदों, सपनों और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का समय है, जो मुस्कान और सकारात्मकता लाएगा.
• ज्योतिषीय दृष्टिकोण: कुछ ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के अनुसार, 2026 भारत के लिए आर्थिक विकास और नई ऊंचाइयों को छूने का साल हो सकता है.
• योजना बनाएं: यह नए लक्ष्यों को निर्धारित करने, पुरानी बातों को भूलने और 2026 में प्यार, शांति और सफलता लाने के लिए तैयार होने का एक शानदार अवसर है।
नववर्ष के संकल्प क्यों टूट जाते हैं और वास्तविक परिवर्तन कहां से शुरू होता है?
हर नए वर्ष के आगमन के साथ मन में नई उम्मीदें जन्म लेती हैं। भीतर से एक कोमल-सी आवाज़ आती है—“इस बार मैं बदलूंगा। आने वाले बारह महीनों में मेरा जीवन अलग होगा।” हम पूरे विश्वास और ईमानदारी के साथ अधिक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न रहने, जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाने के संकल्प लेते हैं। शुरुआती कुछ सप्ताह तक यह उत्साह और दृढ़ता बनी रहती है, लेकिन धीरे-धीरे जीवन फिर अपनी पुरानी लय में लौट आता है और हमारे संकल्प फीके पड़ने लगते हैं। अक्सर हम मान लेते हैं कि ऐसा इच्छाशक्ति की कमी या कमजोरी के कारण होता है, जबकि वास्तविक कारण कुछ और है। दरअसल, हम अपने जीवन में परिवर्तन के लिए बाहरी परिस्थितियों के बदलने की प्रतीक्षा करते हैं। हम चाहते हैं कि लोग बदलें, हालात आसान हों और तभी हम खुश हो पाएं। यही प्रतीक्षा हमारे संकल्पों को कमजोर कर देती है। सच्चाई यह है कि हम सीधे दुनिया को नहीं बदल सकते, लेकिन दुनिया के प्रति अपनी प्रतिक्रिया अवश्य बदल सकते हैं। हमारे विचार, हमारे शब्द और हमारा व्यवहार—यही वे माध्यम हैं जिनके जरिए वास्तविक परिवर्तन संभव है। जब इनका स्वरूप बदलता है, तो जीवन का अनुभव अपने आप बदलने लगता है। कल्पना कीजिए, यदि कल आप जागें और अपने जीवन से संतुष्टि का अनुभव करें—अपने घर, परिवार और कार्य से। बिना आत्म-आलोचना के स्वयं को स्वीकार करें, लेकिन बेहतर बनने के प्रति प्रतिबद्ध रहें। दूसरों को भी बिना मन के विरोध के स्वीकार करें और जहां आवश्यक हो वहां करुणा व समझदारी से कार्य करें। कठिन परिस्थितियों में भी भीतर से शांत और स्थिर बने रहें। जब शांति को जीवन का आधार बना लिया जाता है, तब दायित्व बोझ नहीं लगते। सब कुछ परिपूर्ण न होते हुए भी मन प्रसन्न रहता है। आप लोगों को शुभकामनाएं देते हैं, अच्छाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं और अप्रत्याशित परिस्थितियों का भी खुले मन से स्वागत करते हैं। बाहर की दुनिया भले ही वही रहे, लेकिन भीतर का बदलाव जीवन को पूरी तरह रूपांतरित कर देता है। यही विचार की शक्ति है। एक शुद्ध विचार सुखद अनुभूति को जन्म देता है, अनुभूति कर्मों को दिशा देती है और कर्म अंततः हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। स्पष्ट है कि परिवर्तन कभी बाहर था ही नहीं—वह हमेशा भीतर से शुरू होता है। जब व्यक्ति अपने जन्मजात गुणों को प्रकट करता है, प्रेम और करुणा के साथ दूसरों को सशक्त बनाता है, सत्य और न्याय के लिए खड़ा होता है, अतीत से शांति का संबंध स्थापित करता है और क्षमा को अपनाता है—तभी उसकी दुनिया बदलती है। जैसे-जैसे आंतरिक संसार सशक्त होता है, व्यक्ति अपने आसपास के लोगों के लिए स्वाभाविक रूप से शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन जाता है। इसके लिए मन की देखभाल आवश्यक है। प्रतिदिन केवल आधा घंटा ध्यान और सकारात्मक चिंतन मन का आंतरिक पोषण करता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी शांत, शुद्ध और सशक्त संकल्प रचने की क्षमता देता है।
हर रात का अंधेरा छटेगा,
2026 में सूरज, नई चमक के साथ उगेगा
नववर्ष केवल कैलेंडर का परिवर्तन नहीं होता, यह स्वयं से नए सिरे से जुड़ने का अवसर भी है। वर्ष 2026 की शुरुआत में Advisornews.in अपने पाठकों के साथ विचार, आत्ममंथन और सकारात्मक परिवर्तन की इस यात्रा की शुरुआत कर रहा है।

रुक जाता है शिव-शक्ति का गठबंधन, उतारा जाता है पंचशुल! महाशिवरात्रि से पहले बैद्यनाथ धाम में अनोखी परंपरा
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (13 फ़रवरी 2026)
एमसीबी में बिजली उपभोक्ता करीब 3 गुना, सिंचाई पंप 9 गुना बढ़े