परियोजना को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता, मंत्री को लिखा पत्र
पोर्ट ब्लेयर/नई दिल्ली: ग्रेट निकोबार द्वीप समूह की ₹72,000 करोड़ की मेगा विकास परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को एक पत्र लिखकर परियोजना के तहत बनने वाले अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP) के विकास पर कई तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में निजी कंपनियों की भागीदारी, फंडिंग और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है।
निजी स्वामित्व और फंडिंग मॉडल पर कांग्रेस के तीन बड़े सवाल
जयराम रमेश ने परियोजना मूल्यांकन समिति (PPAC) के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री के सामने मुख्य रूप से तीन गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
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100% निजी मालिकाना हक: यदि परियोजना के विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) में किसी भारतीय स्वामित्व वाली निजी इकाई के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई है, तो क्या भविष्य में इसे 100 प्रतिशत निजी स्वामित्व में बदलने की छूट दी जाएगी?
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मोनोपॉली (एकाधिकार) का खतरा: क्या इस रणनीतिक बंदरगाह क्षेत्र में मालिकाना हक का विविधीकरण (Diversification) सुनिश्चित किया जाएगा, या फिर देश के कुछ हवाईअड्डों की तरह ऐसी स्थिति बनने दी जाएगी जहां एक ही कॉर्पोरेट समूह का पूरी परिसंपत्ति पर एकाधिकार हो जाए?
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बजटीय सहायता पर असमंजस: जब पीपीपीएसी ने इस परियोजना के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) अनुदान देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, तो क्या मंत्रालय अब अपने वार्षिक बजट से इस प्रोजेक्ट को पूंजीगत सहायता प्रदान करेगा?
पर्यावरणीय विनाश और कॉर्पोरेट लाभ के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने इस मेगा प्रोजेक्ट के कारण निकोबार के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। जयराम रमेश इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी पत्र लिखकर इसके दुष्प्रभावों से आगाह कर चुके हैं। उनका आरोप है कि गलाथिया बे (Galathea Bay) में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के निर्माण से वहां की विशाल प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), दुर्लभ कछुओं के घोंसलों और स्थानीय जनजातियों के अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा होगा।
इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सरकार के उन दावों को भ्रामक बताया जिसमें इसे राष्ट्रीय रक्षा और व्यापारिक विकास के लिए जरूरी कहा जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस पूरी परियोजना का असल मकसद देश की सबसे संवेदनशील और सुरक्षित पारिस्थितिकीय भूमि को एक खास उद्योगपति के हवाले करना है, ताकि वहां बड़े पैमाने पर निजी होटल और कैसीनो विकसित किए जा सकें।
क्या है ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना?
नीति आयोग के विजन के तहत तैयार की गई इस विशाल परियोजना का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत चार मुख्य बुनियादी ढांचों का विकास किया जाना प्रस्तावित है:
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एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (ICTP)
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एक नागरिक-सह-नौसैनिक हवाईअड्डा (Dual-use Airport)
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एक आधुनिक टाउनशिप (ग्रीनफील्ड सिटी)
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परियोजना को ऊर्जा देने के लिए एक गैस और सौर आधारित बिजली संयंत्र
फिलहाल, विपक्ष ने केंद्रीय मंत्री सोनोवाल से इस परियोजना के लिए निजी भागीदारों के चयन और निविदा (टेंडर) जारी करने की सटीक समय-सीमा को सार्वजनिक करने का आग्रह किया है।

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