सामुदायिक भवन या चर्च? जांच के बाद प्रशासन ने ढहाया निर्माण
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार को जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विवादित निर्माण पर बुलडोजर चला दिया। शहर के प्रतिष्ठित सेंट पॉल स्कूल परिसर के समीप बन रहे एक विवादित सामुदायिक भवन के ढांचे को प्रशासन ने तड़के ही जमींदोज करना शुरू कर दिया। मंगलवार सुबह से शुरू हुई इस आकस्मिक कार्रवाई में कई जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से अवैध और निर्माणाधीन पक्के ढांचे को पूरी तरह तोड़ दिया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने या किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए संवेदनशील इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल मुस्तैद कर दिया गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: छावनी में तब्दील हुआ इलाका, रास्ते किए गए बंद
जब प्रशासन और नगर निगम का दस्ता दलबल के साथ मौके पर पहुंचा, तो सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सेंट पॉल स्कूल की तरफ आने-जाने वाले दोनों मुख्य मार्गों को अस्थायी रूप से बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
मजबूत प्रशासनिक घेरेबंदी के बीच मौके पर खुद अपर कलेक्टर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ADCP) सहित राजस्व, नगर निगम और पुलिस विभाग के तमाम वरिष्ठ आला अधिकारी खुद मोर्चा संभाले रहे। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि पूरा इलाका किसी छावनी जैसा नजर आ रहा था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि कोई भी असामाजिक तत्व माहौल खराब न कर सके।
क्यों शुरू हुआ था विवाद? संगठनों ने चर्च निर्माण का लगाया था आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, सेंट पॉल स्कूल परिसर के पास बन रहे इस सामुदायिक भवन को लेकर पिछले काफी समय से स्थानीय स्तर पर भारी गतिरोध और विवाद की स्थिति बनी हुई थी। हिंदूवादी और विभिन्न स्थानीय संगठनों का आरोप था कि यहां सामुदायिक भवन की आड़ में चुपके से एक बड़े चर्च का अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इस बात को लेकर धीरे-धीरे स्थानीय लोगों और संगठनों में आक्रोश बढ़ता गया और कई सामाजिक संगठनों ने इसकी शिकायत करते हुए निर्माण कार्य पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद से ही यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा था।
लीज खत्म होने के बाद निगम ने की नियमानुसार कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने दस्तावेजों की बारिकी से पड़ताल की। रायपुर नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित जमीन की लीज (पट्टा) की अवधि पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी, जिसके बाद यह निर्माण पूर्णतः अवैध की श्रेणी में आ गया था। लीज खत्म होने और अवैध निर्माण की पुष्टि के बाद ही नगर निगम और जिला प्रशासन ने इस विध्वंस की कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह से कानून और तय नियमों के दायरे में रहकर की गई है। फिलहाल, मौके पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम है।

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