मल्होत्रा से पहले 3 बीजेपी विधायकों पर गिरी गाज: दो की सदस्यता खत्म, एक को राहत
प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त हो गया है। मल्होत्रा से पहले भी प्रदेश में तीन विधायकों के चुनाव/ विस सदस्यता पर न्यायालयीन कार्रवाई हो चुकी है। इनमें से एक को राहत मिली, जबकि दो की विधायकी चली गई थी। प्रदेश में मुकेश मल्होत्रा से पहले तीन विधायकों की सदस्यता को कोर्ट शून्य घोषित कर चुकी है। ये तीनों ही भाजपा की सीट पर विधायक चुने गए थे।
आशारानी की सीट सजा के कारण गई
बिजावर से वर्ष 2008 में भाजपा की सीट पर विधायक बनीं आशारानी को वर्ष 2013 में आपराधिक मामले में सजा सुनाई गई थी। सजा के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनकी विधायकी स्वतः समाप्त हो गई थी। उन्हें मध्य प्रदेश में सजा के कारण अयोग्य घोषित होने वाली पहली महिला विधायक भी माना जाता है।
नीना वर्मा का चुनाव रद्द हुआ था
इसके साथ ही वर्ष 2008 और वर्ष 2013 के चुनाव में दो बार धार से विधायक नीना वर्मा का चुनाव रद्द हुआ था। पहली बार में रिकाउंटिंग में एक वोट से जीतने के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद 2012 में चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। इसके बाद दूसरी बार 2017 में चुनाव में फार्म में पूरी जानकारी नहीं भरने के कारण उनका चुनाव शून्य घोषित किया गया था। अदालत ने माना था कि चुनाव प्रक्रिया में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के नियमों का पालन नहीं किया गया था, इसलिए उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया गया। यह याचिका कांग्रेस प्रत्याशी ने दायर की थी। हालांकि, बाद में नीना वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें प्रारंभिक राहत मिली थी, लेकिन वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए 2013 का चुनाव शून्य माना।
राहुल सिंह लोधी को मिली थी राहत
वहीं, वर्ष 2022 में टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक राहुल सिंह लोधी का चुनाव भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया था। कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने उनके खिलाफ याचिका दायर की थी। आरोप था कि लोधी ने एक निजी कंपनी में अपनी साझेदारी की जानकारी छिपाई थी, जो सरकारी कार्यों से जुड़ी थी। अदालत ने उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाले लाभों पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें स्टे मिलने पर राहत मिल गई थी।
कांग्रेस के पास अब 63 विधायक
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में कुल 230 सीटों में से कांग्रेस ने 66 सीटों पर जीत दर्ज की थीं। इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान छिंदवाड़ा जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित अमरवाड़ा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश्वर शाह भाजपा में शामिल हो गए थे। बाद में हुए उपचुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। वहीं, विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। भाजपा ने उन्हें मंत्री भी बनाया था, लेकिन उपचुनाव में रावत को कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा के सामने हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, बीना सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने भी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता ले ली थी, हालांकि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया। इस मामले में उनकी सदस्यता को लेकर विवाद न्यायालय में लंबित है और कांग्रेस इस सीट पर उपचुनाव की मांग कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे- सिंघार
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह लेने के बाद इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। सिंघार ने कहा कि विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को अपना जनादेश दिया है और पार्टी को उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा।
भाजपा आदिवासी नेतृत्व को कमजोर कर रही- पटवारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा एक आदिवासी विधायक को पदमुक्त करवाकर हारे हुए प्रत्याशी को विधायक घोषित करवाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी और दलित नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
चुनाव में पारदर्शिता जरूरी- रावत
विजयपुर सीट पर न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नामांकन के समय प्रत्याशी को शपथपत्र में सभी जानकारियां सही और पूरी देना अनिवार्य होता है। रावत ने कहा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रत्याशी को अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों और अन्य जानकारियों का खुलासा करना होता है, ताकि मतदाता पूरी जानकारी के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र में छिपाई थी, जिसके कारण उन्होंने चुनाव याचिका दायर की थी और अदालत ने उसी आधार पर फैसला सुनाया है।

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