एडवोकेट दीपाली पांडेय

समान नागरिक संहिता का महत्व 

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) का अर्थ है भारत के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून का होना।
वर्तमान स्थिति
गोवा में पुर्तगाली नागरिक संहिता के रूप में पहले से ही एक सामान्य नागरिक कानून लागू है। उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपने मध्यप्रदेश में भी समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिए हैं। अन्य कई राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश में भी लागू हुआ नया कानून

आपको पता ही होगा कि हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक कानून लागू किया गया है जिसका नाम है समान नागरिक संहिता l जिसमें सभी धर्म के नागरिकों के लिए विवाह तलाक संपत्ति के उत्तराधिकार बच्चा गोद लेने के प्रावधान लिविंग रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में एक समान नियम लागू करता हैl 
नागरिकों के अधिकारों की रक्षा 

मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रस्तावित कानून के जरिये राज्य के सभी वर्गों के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।विधानसभा ने 21 जुलाई को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भारी हंगामे के बीच ‘मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से मंजूरी दी थी।मुख्यमंत्री ने इस मौके पर संवाददाताओं से कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक पारित होने के बाद मध्यप्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां सभी वर्गों के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा समान कानूनों के आधार पर की जा सकेगी।
मध्यप्रदेश के इस नए यूसीसी विधेयक के मुख्य कानूनी प्रावधान इस प्रकार हैं:

प्रमुख प्रावधान और नियम

•    बहुविवाह पर रोक: राज्य में सभी धर्मों के लिए एक से अधिक विवाह (Polygamy) को पूरी तरह अमान्य और गैर-कानूनी घोषित किया गया है। 
•    विवाह और तलाक का पंजीकरण: विवाह का रजिस्ट्रेशन अब ग्रामीण स्तर तक अनिवार्य होगा और 2008 के बाद की सभी शादियों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया हैl 
•    विवाह आयुः पूरे प्रदेश में समान विवाह आयु निर्धारित की गई है युवानों के लिए किस एवं युवतियों के लिए विवाह आयु 18 वर्ष तय की गई हैl
•    तलाकः  तलाक केवल कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही मान्य होगा, किसी भी पारंपरिक या मौखिक तरीके (जैसे निकाह, हलाला या तीन तलाक) को दीवानी तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। 
•    लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण: लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। यदि किसी पुरुष साथी की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो इसकी सूचना उनके माता-पिता और स्थानीय पुलिस को दी जाएगी। 
•    समान उत्तराधिकार अधिकार: बेटे, बेटी, विधवा और विधुर सभी को संपत्ति में बराबर का अधिकार दिया गया है। 
•    समान अधिकारः कानून में से 'अवैध संतान' (Illegitimate Child) शब्द हटा दिया गया है; लिव-इन, सरोगेसी या आईवीएफ से पैदा हुए बच्चों को भी समान कानूनी व संपत्ति अधिकार मिलेंगे। 
•    आदिवासी समाज को छूट: मध्यप्रदेश की विशाल आदिवासी आबादी (जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा आदि) को उनकी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
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इसके लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा 
    लीव इन रिलेशनशिप समाप्त हो जाने के बाद या पुरुष द्वारा छोड़े जाने पर महिला को भरण पोषण का अधिकार प्राप्त रहेगाl 
    धर्म एवं समुदाय से परे माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार बेटियों को भी बेटों के समान अधिकार दिया गया है l   
    यदि रिश्ता शुरू होने के एक माह के अंदर आपने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो 3  माह की जेल तथा 10000 तक का जुर्माना हो सकता है । 
    रजिस्टर द्वारा नोटिस दिए जाने पर भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है तो 6 महीने की जय तथा 25000 तक का जुर्माना हो सकता है या दोनों हो सकता है l 
    यदि आपके द्वारा गलत जानकारी दी गई है तो 3 माह की जेल तथा 25000 तक का जुर्माना हो सकता हैl 
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