एडवोकेट दीपाली पाण्डेय एवं वृंदा मनजीत

पुण्य सलिला नर्मदा को जीवनदायीनी क्यों कहा जाता है? क्योंकि यह नदी जिसका कि आध्यात्मिक महत्व है इसके साथ ही जीवन उपयोगी भी है आइए देखें कैसेः-

कृषि व सिंचाई का आधार

इसके जल से सरदार सरोवर, बरगी, इंदिरा सागर जैसे विशाल बांधों के माध्यम से लाखों हेक्टर सूखे खेतों में सिंचाई की सुविधा मिलती है। इस पर जो बांध निर्मित है उससे 1 लाख हैक्टर से अधिक भूमि जीवित होती है। इसकी बरगी योजना से जबलपुर व नरसिंहपुर जिले में 1.57 लाख हेक्टर भूमि को लाभ मिलता है।

पेयजल आपूर्ति

नर्मदा नदी से पेयजल आपूर्ति मध्यप्रदेश में ही नहीं परंतु गुजरात एवं राजस्थान में भी होती है। मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, खण्डवा, खरगोन में पेयजल आपूर्ति होती है। गुजरात में गांधीनगर, अहमदावाद, वडोदरा, सौराष्ट्र व कच्छ जो एक रण प्रदेश है उनमें नर्मदा कैनाल से जल आपूर्ति होती है। राजस्थान में जालौर और बारनेर में भी नर्मदा केनाल नेटवर्क से जल आपूर्ति होती है। इंदिरा सागर डेम और सरदार सरोवर डेम लगभग 4-5 करोड लोगों की प्यास बुझाता है।

बिजली उत्पादन

नर्मदा नदी पर जो विभिन्न डेम बने हैं उससे बिजली उत्पादित होती है। नर्मदा घाटी परियोजना के अंतर्गत सरदार सरोवर परियोजना के कारण सतही जल सिंचाई और भूजल भंडारों के पुनर्भरण से लगभग 50% (1350 मेगावाट) बिजली की बचत होती है। इसके अतिरिक्त, परियोजना से 1450 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होता है। इंदिरा सागर परियोजना, ओंकारेश्वर परियोजना, बरगी बांध, महेश्वर परियोजना से बिजली का उत्पादन होता है।
नर्मदाजी को जीवनदायिनी इसलिए माना जाता है क्योंकि, वो न केवल पेयजन या बिजली देती है अपितु दुःखों का नाश करके सुख प्रदान करती है। उनका दर्शन ही व्यक्ति को पाप व भय से मुक्ति देता है। नर्मदा अष्टकम की ये पंक्ति इस भाव को प्रदर्शित करती है।


गतं सदैव मे भवं त्वदम्बुवीक्षितं यदा मृकण्डसूनुशौनकासुरारिसेवि सर्वदा।

पुनर्भवाब्धिजन्मजं भवाब्धिदुःखवर्मदे त्वद्‌द्यापादपंकजं नमामि देवी नर्मदे ।।4।।

अर्थात मैं देवी नर्मदा को श्र‌द्धापूर्वक नमन करती हूँ। हे देवी, आपके दिव्य जल को देखने के बाद, सांसारिक जीवन के प्रति मेरा लगाव वास्तव में गायब हो गया है।
आगामी लेखों में हम नर्मदा नदी के इन पहलुओं को और गहराई से समझने का प्रयास करेंगे।