मकर संक्रांति in Gujarat: परंपरा, पतंग और प्लेट भर पोषण
- वृंदा मनजीत
जब जनवरी की धूप हल्की-सी गरमाहट देने लगती है, तब गुजरात की छतों पर सिर्फ पतंगें ही नहीं उड़ती उड़ता है उत्साह, परंपरा और उड़ती है एक पूरी जीवनशैली। मकर संक्रांति, यहं कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि आसमान से लेकर रसोई तक मनाया जाने वाला उत्सव है गुजरात में मकर संक्रांति का मतलब सिर्फ 'काईपो छे' नहीं होता, इस दिन जो सबसे खास उड़ान भरती है, वह है स्वाद और पोषण की उड़ान जहां उंधियुं, पोंक और जलेबी सिर्फ व्यंजन नहीं, परंतु मौसम और संस्कृति की पहचान बन जाते हैं।जब सूर्य उत्तरायण होता है, तब गुजरात सिर्फ त्योहार नहीं मनाता वह अपनी कृषि परंपरा, मौसमी भोजन और सामूहिक संस्कृति को भी सेलिब्रेट करता है। मकर संक्रांति, यहां प्रकृति के साथ तालमेल का पर्व बन जाता है। उत्तरायण की सूर्य की किरणों में बैठकर पूरे वर्ष की ऊर्जा को समेटने का उत्सव है संक्रांति ।मकर संक्रांति के दिन गुजरात में आसमान रंगीन होता है, रसोई खुश्बू से भर जाती है, और परंपराएं प्लेट में उतर आती है। यह त्योहार बताता है कि खाना सिर्फ स्वाद नहीं, एक संस्कार भी है।
मकर संक्रांतिः
जब गुजरात की धरती स्वाद परंपरा और उत्सव से महक उठती है
भारत विविधताओं का देश है और यहां हर त्योहार अपने साथ एक अनोखी पहचान लेकर आता है। मकर संक्रांति ऐसा ही एक पर्व है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नाम रूप और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। लेकिन गुजरात में मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव है।जब आसमान भी उत्सव में शामिल हो जाता हैगुजरात में मकर संक्रांति को 'उत्तरायण' कहा जाता है। इस दिन से सूर्य नारायण दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गुजरात की खास बात यह है कि यहां लोग छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाते हैं, और पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। 'काईपो छे!' की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और पारिवारिक मेल-मिलाप इस पर्व को और खास बना देते हैं।
त्योहार जो पेट और दिल दोनों भर देता है अगर कहा जाए कि गुजरात में त्योहार स्वाद के बिना अधूरा है, तो गलत नहीं होगा। उत्तरायण पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन इसे बाकी राज्यों से बिलकुल अलग पहचान देते हैं।
उंधियूं
सर्दियों का शाही पकवान
उंधियूं गुजरात का सबसे प्रतिष्ठित शीतकालीन व्यंजन है। यह कई प्रकार की मौसमी सब्ज़ियों, जैसे बैंगन, शकरकंद, सुरती पापडी, आलू, हरी मटर और मेथी से बने मुठिया को धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है।
खास बातः
उंधियूं को पारंपरिक रुप से मिट्टी के बर्तन में उल्टा रखकर पकाया जाता है, इसी से इसका नाम पड़ा 'उंधियूं'।
उंबाडियूः
जंगल से रसोई तक
उंबाडियूं उंधियूं का ही एक देसी और ग्रामीण रूप है। यह मुख्यतः दक्षिण गुजरात में बनाया जाता है और इसे जंगलों में या खुले मैदान में मिट्टी के बर्तन में भरकर जमीन में गाढ़कर पकाया जाता है। इसमें जंगली सब्ज़ियां और मसाले होते हैं, जो इसे एक स्मोकी और देसी स्वाद देते हैं।
ताजगी का हरा सोना
पोंक, हरी ज्वार की कोमल बालियों से बनता है और यह सिर्फ कुछ हफ्तों के लिए ही उपलब्ध होता है। इसे भूनकर या कच्चा प्याज, नींबू, सेव और गुजरात में पोंक को सर्दियों का स्नैक नहीं, मसालों के साथ खाया जाता है। बल्कि एक इमोशन माना जाता है।
नींबू-काली मिर्च की सेव और जलेबीः
खट्टा-तीखा और मीठे का जादुई संगम
उत्तरायण का नाश्ता अधूरा है बिना चटपटी नींबू-काली मिर्च की सेव के और खस्ता, रस से भरी गरमागरम जलेबी के।
तिल और गुडः
रिश्तों में मिठास का संदेश
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डु, चिक्की और मिठाइयां बांटी जाती है। गुजरात में कहा जाता है सिर्फ खाने तक सीमित नहीं, तिल-गुड खाओ और मीठा मीठा बोलो। यह संदेश बल्कि सामाजिक सौहार्द और सकारात्मकता का प्रतीक है।
गैर-गुजरातियों के लिए क्यों खास है गुजरात की संक्रांति?
यहां त्योहार देखा नहीं जिया जाता है। खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, परंतु परंपरा निभाने के लिए होता है। आसमान, छत, रसोई और रिश्ते सब एक साथ उत्सव में डूब जाते हैं।
मकर संक्रांति गुजरात में सिर्फ एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाद और सामूहिक खुशी का उत्सव है। जो भी व्यक्ति इस समय गुजरात आता है, वह सिर्फ पतंग नहीं उड़ाता वह गुजरात को महसूस करता है।
सर्दियों की सौगातः
जब प्रकृति खुद थाली सजा देती है
मकर संक्रांति का समय सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य का प्रतीक भी है। गुजरात में इस मौसम को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि सर्दियों में लगभग सभी सब्ज़ियां अपने शिखर पर होती हैं-स्वाद में भी और पोषण में भी।
क्यों खास है यह मौसम ?
सर्दियों मे मिट्टी में नमी संतुलित रहती है, धूप पर्याप्त होती है, रासायणिक हस्तक्षेप कम होता है। नतीजा यह है कि सब्ज़ियां प्राकृतिक रूप से पनपती है, जिनमें विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं।
उंधियूः
थाली में उतरा हुआ पूरा खेत
गुजरात की परंपरा में उंधियूं पूरे मौसम का सार है। इसे बनाने का विचार बहुत गहरा और वैज्ञानिक है। कहते हैं प्रकृति जब सब कुछ दे रही है तो एक ही थाली मं सब क्यों न लिया जाए?उंधियूं में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्ज़ियां और उनका पोषण
सुरती पापड़ी - प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हरी मटर - विटामिन सी और एन्टिओक्सिडेंट्स से भरपूर शकरकंद - प्राकृतिक ऊर्जा, आयरन और विटामिन ए आलू - कार्बोहाइड्रेट्स और पोटेशियम बैंगन -हृदय के लिए फाइबर जैसे लाभदायक तत्वकच्चा केला पाचन को मजबूत करता है मेथी, बेसन, गेहूं का आटा, बाजरे का आटा गुण आयरन, कैल्शियम और हर्बल
इन सबको एक साथ पकाने से यह व्यंजन संतुलित आहार बन जाता है।
उत्तरायण का स्वास्थ्य और समाज से गहरा संबंध
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तर दिशा की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं जिसे उत्तरायण कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में उत्तरायण को अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती है जो लाभकारी होती है।
उत्तरायण की सूर्य किरणें और स्वास्थ्य
उत्तरायण के दौरान सूर्य कि किरणों में विशेष रुप से विटामिन-डी की मात्रा अधिक प्रभावी होती है। सर्दियों में शरीर में जमी हुई ठंडक और आलस्य को दूर करने में यह सूर्य प्रकाश सहायक होता है। त्वचा पर पड़ने वाली धूप हड्डियों को मजबूत बनाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और मानसिक तनाव को भी कम करती है।यही कारण है कि हमारे पूर्वजों ने इस समय तिल, गुड, बाजरा, शकरकंद जैसे कई पौष्टिक व्यंजनों को भोजन में शामिल किया ताकि शरीर को गर्मी और ऊर्जा मिल सके।
गुजरात में पतंगोत्सव का महत्व
गुजरात में मकर संक्रांति को केवल धार्मिक पर्व के रूप में नहीं परंतु लोकउत्सव के रुप में मनाया जाता है। इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। बच्चे, युवा, बुजुर्ग, बीमार सभी छतों पर एकत्र होकर पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ता पतंग महोत्सव
आज गुजरात का इंटरनेशनल काइट फैसेटिवल विश्वभर में प्रसिद्ध हो चुका है। हर वर्ष देश विदेश से पतंगबाज गुजरात आते हैं जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। यह उत्सव गुजरात की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है और स्थानीय कलाकारों व कारीगरों को नई पहचान देता है।
वर्ष 2026 के इन्टरनेशनल काइट फैस्टिवल में रुस, यूक्रेन, इजराइल, जॉर्डन, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, कोलंबिया और रिपब्लिक ऑफ कोरिया जैसे 50 देशों के 135 पतंगबाजों ने हिस्सा लिया था। तीन दिन के इस फैस्टिवल का उदघाटन 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी ने किया था और उनके साथ जर्मन चांसलर फ्रैडरिक मर्ज भी उपस्थित थे।
2026 में गुजरात में हुए पतंग फैस्टिवल के दौरान पतंग बिक्री से हुए आर्थिक लाभ के बारे में सटीक आंकडा नहीं मिला लेकिन उद्योग सालाना करीब रु.650 करोड का है और यह वर्ष भी करीब करीब रु.600-700 करोड़ ही रहा है।
पतंग उद्योग में गुजरात में लगभग 1,30,000 लोग पतंग बनाने के कार्य में जुटे हैं।
चलिए, अगले वर्ष मिलते हैं मकर संक्रांति के इस पतंगोत्सव में। तब तक हमारे लेख पढ़ते रहिए और टिप्पणी करते रहिए।

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